आज की बात : अखिल की सौगात
आज जैन समाज के गौरव दानवीर भामाशाह का जन्मदिन है।उन्हें अपनी मातृभूमि से अगाध प्रेम था। उन्होंने जब अपने मित्र महाराणा प्रताप को संकट में देखा तो अपना सारा खजाना राणा प्रताप के चरणों में समर्पित कर दिया।उन्होंने अपने जीवन की गाढी कमाई जो जैन मंदिर बनाने के लिए इकट्ठी की थी, एक क्षण में अपने देश पर संकट आने पर दान कर दी।अपरिग्रह वृत्ति का ऐसा उदाहरण शायद ही कहीं अन्यत्र देखने को मिले। जब भामाशाह से राणा प्रताप बोले- कि अब आप मंदिर कैसे बनाओगे तब भामाशाह का जवाब था- हुकुम मातृभूमि बचेगी तो 100 मंदिर बन जाएंगे और यही नहीं रही तो उन मंदिरो का क्या करेंगे।ऐसे राष्ट्र भक्त दानवीर भामाशाह के उपकार को युगों-युगों तक भुलाया नहीं जा सकता।अ.भा.जैन पत्र संपादक संघ एवं अथाई-आशा इन्टरनेशनल की ओर से शत्-शत् नमन।